"पुपरी एक नज़र"

पुपरी एक छोटा सा शहर है जो कि बिहार के सीतामढ़ी जिले के अंतर्गत आता है। तिरहुट डिवीज़न में पड़ने वाला यह शहर अपने जिले से 28 किलोमीटर दूरी पर स्थित है। जैसे कि पुपरी एक कृषि - आधारित नगर है यहाँ काफी हलचल रहती है व यह एक पर्यटक स्थान भी है। पुपरी का पोस्टल हेड ऑफिस जनकपुर रोड है एवं यहाँ का पिन कोड 843320 है। पुपरी अपने बाबा नागेश्वर नाथ मंदिर के लिए जाना जाता है जो कि भगवान शिव का मंदिर है। इसके साथ ही यहाँ का जानकी देवी मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। पुपरी में बोली जाने वाली मुख्य भाषा मैथली है। यहाँ आस पास पड़ने वाले नगर नानपुर, बजपति जयनगर आदि है।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग : अगर आप हवाई मार्ग से पुपरी पहुँचना चाहते है तो पटना एअरपोर्ट ही एकमात्र एअरपोर्ट है जारी

स्थानीय क्षेत्रों

पुपरी एक मुख्य नगर तो है जो कि कई सारे उपनगरों और मध्यम शहरों से जुड़ा हुआ है। उन में से कुछ इस प्रकार हैं : जारी

सीतामढ़ी

सीतामढ़ी की स्थापना सन 1971 की 11 दिसंबर को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वरा कि गयी गई थी।     जारी

दरभंगा

दरभंगा सीतामढ़ी जिले के अंतर्गत आने वाला एक छेत्र है। काठमांडू स्टेशन से केवल     जारी

मधुबनी

मधुबनी सीतामढ़ी जिले का दक्ष्णि हिस्सा है जिसकी स्थापना 1971 में दरभंगा के कुछ भागों का नवनिर्माण     जारी

पिपरहर

पिपरहर पिन कोड सीतामढ़ी जिला , बिहार , भारत में 843 320 . पिपरहर , सीतामढ़ी जिला , बिहार ,     जारी

हरिहरपुर

हरिहरपुर पिन कोड सीतामढ़ी जिला , बिहार , भारत में 843 320 . पिपरहर , सीतामढ़ी जिला , बिहार ,     जारी

नानपुर

ददरी पिन कोड सीतामढ़ी जिला , बिहार , भारत में 843 333 . ददरी , सीतामढ़ी जिला , बिहार , भारत के लिए     जारी

हरिहरपुर

एक छोटा सा गाँव

राजधानी पटना से 134 किलोमीटर दूर हरिहरपुर भारत के बिहार राज्य में स्थित एक छोटा सा गाँव है, जो कि राज्य के सीतामढ़ी जिले के अंतरगत आता है। यह गाँव अपने ब्लॉक पुपरी से केवल 4 किलोमीटर दूर है एवं तिरहुट डिवीज़न में अंकित किया जाता है। राज्य के अन्य गांवो की भाती यहाँ भी आप हर एक मूलभूत सुविधा का लाभ उठा सकते है फिर चाहें वह पोस्ट ऑफिस, स्कूल या टेलीफोन बूथ ही क्यों न हो। हरिहरपुर गाँव का अपना एक माध्यमिक शिक्षा स्कूल भी है जो कि गाँव में ही पड़ता है। यह सुंदर सा गाँव एक अच्छी-खासी एवं फलती-फूलती आबादी के साथ हरा भी भरा है। इस गाँव में बोली जाने वाली मुख्य बोली वैसे तो मैथली है लेकिन इसके अलावा हिंदी एवं कही-कही उर्दू जैसी भाषाओ को भी प्रयोग में लाया जा सकता है।

महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि तथा कांवड यात्रा

महाशिवरात्रि में होती चार प्रहर पूजा

विश्व में एक मात्र बैद्यनाथ नगरी ही है जहां महाशिवरात्रि के मौके पर देवाधिदेव महादेव की चार प्रहर पूजा की जाती है। यह परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। देवनगरी में महाशिवरात्रि महोत्सव शिव विवाह उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर देश के कोने-कोने से भोलेदानी के भक्तों का आगमन होता है। महाशिवरात्रि व्रत की प्रधानता मंगल कामना के लिए विशेष महत्व रखता है। इस अवसर पर मनोकामना लिंग की पूजा-अर्चना रजोपचार विधि से चार प्रहर तक की जाती है। शिवरात्रि में सायं काल छह से नौ बजे तक प्रथम प्रहर अघोर पूजा दूध द्वारा किया जाता है। द्वितीय प्रहर में रात्रि नौ से 12 बजे तक तत्पुरुष पूजा के रूप में दही द्वारा किया जाता है। इस काल को विवाह योग भी कहा जाता है। रात्रि 12 बजे से तीन बजे तक तृतीय प्रहर वामदेव की पूजा घी अर्पण कर की जाती है एवं तड़के तीन बजे से प्रात: छह बजे तक चतुर्थ प्रहर ईशान पूजा मधु से की जाती है। इस मौके पर पंचव्रतम त्रिनेत्रम् की मंत्रध्वनि से भोले की पूजा-अर्चना होती है। साथ ही इन चारों प्रहर में अघौराय नम:, तत्पुरुषाय नम:, वामदेवाय नम: ईशानाय नम: मंत्रोच्चार से वातावरण गुंजायमान हो जाता है। ज्ञात हो कि रजोपचार विधि विधान के माध्यम से चारों प्रहर भोलेदानी की पूजा-अर्चना में ढोल नगाड़े बाजे गाजे के साथ धूप, दीप, नैवेद्य, गुलाल, मिष्ठानों का भोग लगाकर मंत्रोच्चर के साथ चारों प्रहर शंख ध्वनि के साथ पूजा-अर्चना की जाती है।

रोहिणी से आता है बाबा का मुकुट

निगम क्षेत्र के ऐतिहासिक नगर रोहिणी में बाबा बैद्यनाथ मंदिर में तिलकोत्सव पर पटवासी तथा महाशिवरात्रि के दिन मोर मुकुट चढ़ाने की परंपरा रोहिणी घटवाल परिवार द्वारा चली आ रही है। इस परंपरा का निर्वहन करते हुए ठाकुर परिवार के वंशज संजीव देव द्वारा किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि लगभग तीन सौ वर्ष से बाबा बैद्यनाथ को रोहिणी स्टेट द्वारा मुकुट चढ़ाने की परंपरा चली आ रही है।

देवघर कांवड़ यात्रा

देवघर में कांवड़ चढ़ाने का बड़ा ही महत्व है. श्रद्धालु भक्त सुल्तानगंज से गंगा का जल लेकर लगभग 106 किलोमीटर की दूरी पैदल यात्रा करते हुए देवघर बाबाधाम की यात्रा करते हैं. रास्ते में कई धर्मशाला हैं जहां वह विश्राम करते हुए अपनी यात्रा पूरी करते हैं. कांवड़ चढ़ाने वाले इन बामों को सामान्य बम कहा जाता है. यह रास्ते भर बोल बम-बोल बम का नारा लगाते हैं.

बैद्यनाथ धाम यात्रा

बाबा धाम और बैद्यनाथ धाम के रूप में जाना बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मंदिर, बारह ज्योतिर्लिंग में से एक, शिव का सबसे पवित्र है. यह झारखंड, भारत के राज्य के संथाल परगना विभाजन में देवघर में स्थित है. यह बाबा ज्योतिर्लिंग स्थापित है जहां बैद्यनाथ, और 21 अन्य मंदिरों के मुख्य मंदिर से मिलकर मंदिर परिसर है.
हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, दानव राजा रावण वह बाद में दुनिया में कहर बरपा है कि इस्तेमाल किया बून्स पाने के लिए मंदिर के वर्तमान स्थल पर शिव की पूजा की. रावण एक बलिदान के रूप में शिव को उसके दस सिर एक के बाद एक की पेशकश की. इस से प्रसन्न, शिव घायल हो गया था जो रावण का इलाज करने के लिए उतरा. वह एक चिकित्सक के रूप में काम के रूप में, वह शिव के इस पहलू से के रूप में जाना जाता है, यह मंदिर अपने नाम निकला है. जारी

प्रयटन स्थल

सुल्तानगंज

सुल्तानगंज 109 किमी दूर बाबा धाम से बिहार के भागलपुर जिले में एक गांव है. जारी

बैद्यनाथ धाम

बैद्यनाथ धाम या बाबा धाम के रूप में जाना देवघर रेलवे और रोडवेज दोनों ने जारी

जनकपुर धाम

जनकपुर के रूप में जाना जनकपुर, नेपाल के ऐतिहासिक और धार्मिक जारी

सीतामढ़ी

सीता समाहित स्थल ( सीतामढ़ी ) , सीतामढ़ी के पवित्र स्थान इलाहाबाद जारी

हमारी टीम

जनता की राय

Arun Mondal 27/02/2014

I have received what I was looking forward to, many thanks for such a nice Website.

Rupali Naidu 24/02/2014

Many thanks to Pupri team for the assistance provided and a well written Information.

Something went wrong... Unable to load map... Please try to enable javascript

आपकी राय

आपकी जानकारी और सुझाव के लिए हम आभारी हैं !